नासा का ऑपरच्युनिटी मार्स रोवर दूसरे ग्रह पर सबसे अधिक समय तक रहते हुए सबसे लंबी दूरी तय करने वाला पहला मानवनिर्मित यान बन गया है।
ऑपरच्युनिटी ने मंगल ग्रह के धरातल पर 26 मील यानी 42 किलोमीटर की दूरी 11 साल दो महीने में पूरी की। हालांकि वैज्ञानिकों को शुरूआत में इसके कुछ ही महीने तक काम करने की उम्मीद थी। सौर चालित रॉबोट जनवरी, 2011 को मंगल के इगल क्रेटर में उतरा था।
केलिफोर्निया में पासाडोना स्थित नासा के जेट प्रोपलशन प्रयोगशाला में ऑपरच्युनिटी के प्रबंध निदेशक जॉन कल्लास ने कहा, ‘यह पहली बार हुआ है कि किसी भी रोवर ने दूसरे ग्रह की सतह पर इतनी अधिक दूरी तय की।’
अपने मिशन के दौरान ऑपरच्युनिटी और उसके जुड़वे स्पिरिट ने पता लगाया कि मंगल पर कभी जलीय वातावरण था और कुछ हद तक जीवन के अनुकूल दशाएं थीं।
ऑपरच्युनिटी ने मंगल ग्रह के धरातल पर 26 मील यानी 42 किलोमीटर की दूरी 11 साल दो महीने में पूरी की। हालांकि वैज्ञानिकों को शुरूआत में इसके कुछ ही महीने तक काम करने की उम्मीद थी। सौर चालित रॉबोट जनवरी, 2011 को मंगल के इगल क्रेटर में उतरा था।
केलिफोर्निया में पासाडोना स्थित नासा के जेट प्रोपलशन प्रयोगशाला में ऑपरच्युनिटी के प्रबंध निदेशक जॉन कल्लास ने कहा, ‘यह पहली बार हुआ है कि किसी भी रोवर ने दूसरे ग्रह की सतह पर इतनी अधिक दूरी तय की।’
अपने मिशन के दौरान ऑपरच्युनिटी और उसके जुड़वे स्पिरिट ने पता लगाया कि मंगल पर कभी जलीय वातावरण था और कुछ हद तक जीवन के अनुकूल दशाएं थीं।


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