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Saturday, May 2, 2015

जलवायु परिवर्तन का प्रभाव, नए अवतार में आएगा सेब

जलवायु परिवर्तन की वजह से तापमान बढ़ रहा है और बर्फबारी में कमी आ रही है। ऐसे में आप जो सेब खाते हैं उसका स्वाद बदल सकता है। अब उत्पादक सेब की ऐसी किस्मों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो बदलते मौसम के अनुरूप पैदा किया जा सके।हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के कम उंचाई वाले इलाकों में कम ठंडक में और जल्द पकने वाली सेब के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। वहीं परंपरागत सेब का उत्पादन अब अधिक उंचाई वाले क्षेत्रों को स्थानांतरित हो रहा है।

हिमाचल के सेब उत्पादक संघ के अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा, कम उंचाई वाले 4,000 फुट तक के क्षेत्रों में परंपरागत किस्मों का उत्पादन जलवायु परिवर्तन व अचानक बदलने वाली मौसम की परिस्थितियों की वजह से मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में पिछले एक-दो साल में हम नई किस्मों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। सिंह के पास शिमला के कोटगढ़ में सेबों का बागान है। उन्होंने कहा कि नई किस्मों का स्वाद भिन्न है, लेकिन ये भारतीय उपभोक्ताओं के हिसाब से अच्छी हैं। कृषि वैज्ञानिकों का भी मानना है कि कम ठंडक वाली किस्मों मसलन ‘माइकल’, ‘ट्रापिकल ब्यूटी’, ‘स्कूलमेट’ आदि का उत्पादन किसानों के लिए अच्छा है।

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में केंद्रीय तापमान बागवानी संस्थान (सीआईटीएच) के निदेशक डॉ नजीर अहमद ने कहा, सेब का उत्पादन धीरे-धीरे उंचे स्थानों की ओर स्थानांतरित होने के बीच हमें ऐसी किस्मों की जरूरत है, जो जल्दी पक सके और जिन्हें ठंडक के तापमान की कम जरूरत हो। मौसम के रिकॉर्ड को देखने के बाद पता चलता है कि अब सर्दियां पिछले दो तीन दशक की तुलना में अधिक गर्म होती हैं।

आपकी हथेलियां बदलेंगी आपका मूड

एक नई प्रौद्योगिकी के जरिए हाथ के विभिन्न हिस्सों से आप में खुशी, दुख, रोमांच या डर के अहसास का संचार किया जा सकता है. वह भी बिना आपको छूए.
ससेक्स विश्वविद्यालय के सूचना विज्ञान विभाग की मारियाना ओब्रिस्ट के अनुसार, अंगूठे, तर्जनी और हथेली के बीच में बेहद थोड़े समय के लिए हवा के तेज धक्कों की मदद से किसी व्यक्ति में रोमांच का अहसास पैदा किया जा सकता है, जबकि धीमे एवं मध्यम दबाव वाले वायु के झोकों की मदद से किसी में दुख के भाव जगाए जा सकते हैं.

मारियाना एक उदाहरण देते हुए कहती हैं कि पत्नी अपने ऑफिस पहुंचकर बैठक में जाती है और इसी दौरान उसकी कलाई पर लगी ब्रेसलेट के जरिए उसकी हथेली के मध्य हिस्से में रोमांचकारी अहसास पैदा किया जा सकता है. इस अहसास से न सिर्फ उसे आराम मिलेगा बल्कि उसे यह भी अहसास होगा कि उसका पति उससे नाराज नहीं है.


परीक्षण के दौरान अल्ट्राहैप्टिक्स प्रणाली के जरिए यह अहसास पैदा किया गया. यह प्रणाली हवा के जरिए हथेली के विभिन्न हिस्सों में छूने से होने वाले अहसास को पैदा करती है.

विभिन्न अहसासों के लिए स्टिमुलेशन पैटर्न का प्रतिभागियों के तीन विभिन्न समूहों पर परीक्षण किया गया. शोधकर्ता के अनुसार, इस प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल एक-दूसरे से दूर रहने वालों के बीच संचार को और जीवंत बनाने के लिए किया जा सकता है.

मेकअप किट के लिए 500 रुपये से कम दाम के 11 ब्यूटी प्रोडक्ट, रखें आपके बजट का ख्याल

मेकअप किट के लिए 500 रुपये से कम दाम के 11 ब्यूटी प्रोडक्ट, जो रखें आपके बजट का ख्याल...

1. मेबेलीन कोलोसल काजल
मेबेलीन काजल लड़कियों के लिए सबसे अच्छी चीजों में से एक है. कोई भी महिला बिना उसके अपने मेकअप किट की कल्पना नहीं कर सकती है. ये एक ऐसा सौंदर्य उत्पाद है जो आपके बजट में आसानी से आ जाता है. ये काजल 12 घंटे तक आंखों में बना रहता है और उन्हें बोल्ड और सुंदर लुक देता है. इसका मूल्य सिर्फ 199 रुपये है और आप इसको ऑनलाइन और सस्ती कीमत में पा सकती हैं.

2. मेबेलीन के आई स्टूडियो लास्टिंग ड्रामा जेल लाइनर
मेबेलीन का ये लाइनर लंबे समय तक आंखों में टिका रहता है. ये वाटरप्रूफ होता और आंखों को ग्लैमरस लूक देता है. ये 24 घंटे तक बना रहता है. ये उन महिलाओं के लिए भी बेहद सुरक्षित है जो लेंस लगाती है और ये नेत्र रोग विशेषज्ञों द्वारा परीक्षण किया हुआ है. इसकी कीमत सिर्फ 475 रुपये है.

3. न्यूट्रोगेना डीप क्लीन ब्लैकहैड एलिमिनटिंग स्क्रब
हम सभी आमतौर पर ब्लैकहैड की समस्या से जूझते हैं. न्यूट्रोगेना ब्लैकहैड की गहरी साफाई करता है और ब्लैकहैड को पूरी तरह से खत्म करता है. ये चिकनी त्वचा के ब्लैकहैड भी आसानी से निकालता है. ये ब्लैकहैड को दोबारा आने से रोकता भी है. इसका मूल्य सिर्फ 129 रुपये है, जो आपकी बजट में होगा.

4. लोटस हर्बल वाइटग्लो स्किन वाइटनिंग एंड ब्राइटनिंग जेल क्रीम
प्राकृतिक रूप से बने इस क्रीम से घातक पराबैंगनी किरणों से त्वचा की रक्षा होती है. इसमें एसपीएफ 25 है. इसे आप ऑनलाइन सस्ते मूल्य पर खरीद सकती हैं. इसका मूल्य 325 रुपये है.

5. लक्मे अबसोलुट व्हाइट इंटेंस कंसीलर
इसमें मॉइस्चराइजिंग तत्व शामिल होने के कारण ये आपकी त्वचा को ड्राई होने से बचाती है. इसमें एसपीएफ 20 और विटामिन बी 3 में शामिल है. ये तेलीय त्वचा वालों के लिए अच्छा विकल्प है. ये सिर्फ 450 रुपए में पाया जाता है.

6. मेबेलीन ड्रीम लुमी टच कंसीलर
ये एक छोटे स्पंज टिप एप्लीकेटर के रूप में आता है. ये गाल और आँखों के नीचे दोनों पर अच्छी तरह से काम करता है और काले घेरे, काले धब्बे और मुँहासों के निशान को ढकता है. वैसे तो इसका मूल्य 500 रुपये है पर आप इसे ऑनलाइन सिर्फ 399 रुपये में खरीद सकती है.

7. कोलोर्बर क्रीम टच लिपस्टिक
कोलोर्बर क्रीम टच लिपस्टिक शीबटर, विटामिन ई और एसपीएफ 15 से समृद्ध हैं. ये 40 से अधिक रंगों में पाया जाता है. ये 475 रुपये में पाया जाता है.

8. कोलोर्बर टच एंड ब्लश
ये गालों को अच्छे से हाईलाइट करता है और एक पेशेवर मेकअप लूक देता है. ये चार रंगों में उपलब्ध है और एक स्पंज एप्लीकेटर के साथ आता है. ये विटामिन ई से समृद्ध हो
ता है और लंबे समय तक टीका रहता है. ये सिर्फ 499 रुपये में उपलब्ध है.

9. मेबेलीन कलर टैटू आई शैडो
आँखों को ग्लॉसी लूक देने के लिए मेबेलीन कलर टैटू आई शैडो का इस्तेमाल किया जाता है. ये पिंक, ब्रोंज़े और गोल्डन रंगों में उपलब्ध है. इसका मूल्य सिर्फ 350 रुपये है.

10. रेवलॉन कलरस्टे आई शैडो
आँखों के मेकअप की बात कर रहे है तो रेवलॉन कलरस्टे आई शैडो का उल्लेख करना जरूरी है. ये आँखों में 12 घंटे तक बना रहता है. ये सिर्फ 195 रुपये में उपलब्ध है.

11. लोरियल टोटल रिपेयर 5 हेयर मॉसक्यू
आपके प्यारे लूक का एक आवश्यक हिस्सा आपके बाल भी हैं, फिर आप कैसे बालों की देखभाल को अनदेखी कर सकती हैं. लोरियल टोटल रिपेयर 5 हेयर मॉसक्यू एक उत्कृष्ट कंडीशनर है और बालों को ग्लैमरश लूक देती है. ये बालों की मरम्मत करता है और बालों को गिरने और ड्राई जैसी समस्याओं से छूटकारा दिलाता है. इसे आप सिर्फ 300 रुपये में खरीद सकती हैं.

ऑयली स्किन के लिए ब्यूटी टिप्स

ग्लोइंग स्किन पाना किसकी ख्वाहिश नहीं होती, लेकिन हममें से ज्‍यादातर लोग अपनी स्किन का ठीक से ध्‍यान नहीं रखते हैं. और कुछ लोग तो तब तक इंतजार करते है जब तक स्किन पूरी तरह से खराब नहीं हो जाती. धूल, धुएं और प्रदूषण से हमारी स्किन को नुकसान पहुंचता है. स्किन की देखभाल के लिए और पिंगमेंटेशन, सेंसिटिविटी और एंटी एजिंग जैसी समस्याओं से बचने के लिए आप थोड़ा सा समय निकाल कर रेग्‍युलर स्किन केयर रूटीन को अपना सकते हैं.
ग्लोइंग स्किन आप भी पा सकते हैं बस जरूरत है आपको रोजाना ये स्टेप्स फॉलो करने की:

क्‍लींजिंग: अपना चेहरा साफ करने के लिए आप नारियल पानी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं. क्‍लींजिंग के बाद स्किन के पोर्स बंद करने के लिए अल्कोहल फ्री टोनर का इस्तेमाल करना चाहिए.


मॉइश्चराइजर: मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल सर्दियों और गर्मियों दोनों में करना चाहिए. अगर आपकी ऑयली स्किन है तो आपको वॉटर बेस्ड जेल और मॉइश्चराइजर का इस्तेमाल करना चाहिए. चेहरे को ठंडे पानी से धोएं. इससे आपके चेहरे का तापमान सही रहेगा, चेहरे पर ऑयल कम आएगा और मुहांसे भी नहीं होंगे.

सनस्क्रीन: सनस्‍क्रीन लोशन लगाना कभी ना भूलें. भारतीय स्किन के हिसाब से SPF 20 सबसे अच्छा रहता है. UVA प्रोटेक्शन वाला सनस्क्रीन नॉर्मल स्किन के लिए खासा फायदेमंद है. अगर आपकी सेंसिटिव स्किन है तो सनब्लॉक UVB प्रोटेक्शन वाला सनस्क्रीन इस्तेमाल कर सकते हैं.

गोरा होने के लिए लगाते हैं क्रीम, तो हो जाएं सावधान!

आजकल कुछ लोग ऐसी स्किन क्रीम का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें पारा पाया जाता है. लोग इन क्रीम को चेहरे पर लगाते हैं या इंजेक्शन से त्वचा के अंदर भी पहुंचाते हैं ताकि अपनी त्वचा को गोरा बना सकें, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि पारा युक्त क्रीम के प्रयोग से गंभीर स्वास्थ्य परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि अब लोग पारायुक्त क्रीमों की पहले से कहीं अधिक तेजी से पहचान कर सकते हैं. कैलिफोर्निया के लोक स्वास्थ्य विभाग के गोर्डन व्रदोलजक ने कहा, ‘अमेरिका में उत्पादों में पारे की सीमा प्रति दस लाख में एक भाग है.’ उन्होंने कहा, ‘विषैले उत्पादों की पहचान करना एक धीमी प्रक्रिया रही है. इसलिए हमने एक ऐसा उपकरण बनाया, जिसके जरिए एक्स-रे की तरंगों के माध्यम से सौंदर्य उत्पादों में मौजूद पारे की पहचान की जा सकती है.'

उन्होंने कहा, ‘पुरानी तकनीक से जहां एक उत्पाद की जांच करने में कई दिन लग जाते थे, वहीं नई तकनीक से एक दिन में 20 से 30 नमूनों का परीक्षण हो जाता है.’ उन्होंने बताया कि ऐसे उत्पादों की पहचान करके हम लोगों को जागरुक करते हैं कि वे उन उत्पादों का इस्तेमाल न करें.

प्रेग्‍नेंट हैं तो तुरंत काफी छोड़ दें, बच्‍चे को हो सकता है ल्‍यूकेमिया

अगर आप प्रेग्‍नेंट हैं और कॉफी की शौकीन हैं तो कुछ समय के लिए अपने इस शौक से दूरी बना लीजिए. जी हां, कॉफी से दूरी बनाकर आप अपने होने वाले बच्‍चे की सेहत को दुरुस्‍त रख सकती हैं. एक रिसर्च में पता चला है कि जो महिलाएं प्रेग्‍नेंसी के दौरान सिर्फ 2 कप कॉफी भी पीती हैं, उनके होने वाले बच्‍चे को ल्‍यूकेमिया होने का खतरा ज्‍यादा होता है.
रिसर्च में पता चला है कि कॉफी पीने वाली महिलाओं के बच्‍चों को बचपन में ही ल्‍यूकेमिया का खतरा 60 फीसदी तक ज्‍यादा होता है. जानकारों का कहना है कि सरकार को इस संबंध में चेतावनी जारी कर देनी चाहिए. सरकार को ठीक उसी तरह प्रेग्‍नेंसी के दौरान कॉफी नहीं पीने के लिए चेतावनी जारी करनी चाहिए, जिस तरह से शराब और स्‍मोकिंग के लिए की जाती है.

उनका मानना है कि कैफीन मां के गर्भ में पल रहे भ्रूण की कोशिकाओं में डीएनए को बदल सकता है और इससे भ्रूण में ट्यूमर के पनपने का खतरा बढ़ सकता है. शोधकर्ताओं ने 20 से भी ज्‍यादा मौजूदा अध्‍ययनों को देखा और पाया कि जो महिलाएं प्रेग्‍नेंसी के दौरान कॉफी पीती हैं उनके बच्‍चों में ल्‍यूकेमिया का खतरा 20 फीसदी ज्‍यादा होता है. यही नहीं उन्‍हें ये भी पता चला कि जो महिलाएं दो कप से ज्‍यादा कॉफी पीती हैं उनके बच्‍चों के लिए खतरा 60 फीसदी बढ़ जाता है.
प्रसूति एवं स्त्री रोग से संबंधित अमेरिकी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार प्रेग्‍नेंसी के दौरान 4 या उससे ज्‍यादा कप कॉफी पीने वाली महिलाओं के बच्‍चों में ल्‍यूकेमिया का खतरा 72 फीसदी ज्‍यादा होता है. गौरतलब है कि यूके में हर साल 500 से भी ज्‍यादा बच्‍चों का ल्‍यूकेमिया का इलाज होता है और यह बच्‍चों में पाया जाने वाला सबसे आम कैंसर है. अच्‍छी बात ये है कि इसका पता जल्‍दी चल जाता है और कीमोथैरिपी से इसका इलाज हो जाता है, इसमें सफलता की दर भी 80 फीसदी है.

ग्रीन टी करती है स्‍पाइनल कॉर्ड के न्‍यूरॉन्‍स की सुरक्षा

अपनी दिनचर्या में ग्रीन टी को आज ही शामिल कीजिए, क्योंकि एक बेहतरीन एंटीऑक्सिडेंट होने के नाते स्‍पाइनल कॉर्ड में चोट लगने के बाद यह आपके तंत्रिका कोशिकाओं को सुरक्षा प्रदान करती है.
चीन के शोधकर्ताओं ने इसका प्रमाण पाया है, जिसके मुताबिक ग्रीन टी में पाया जाने वाला पॉलिफेनॉल्स स्‍पाइनल कॉर्ड की तंत्रिका कोशिकाओं को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस (कोशिकाओं को नष्ट करने की प्रक्रिया) से बचाव कर सकता है, जिससे मुक्त कणों के नुकसान में कमी आ सकती है.

चूहों पर किए गए शोध के बाद मुख्य शोधकर्ता जियान्बो झाओ और लियाओनिंग मेडिकल विश्वविद्यालय के सह शोधकर्ताओं ने पाया कि ग्रीन टी में पाया जाने वाला पॉलिफेनॉल्स ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस को महत्वपूर्ण रूप से कम करता है, जिससे न्यूरोनल एपोप्टोसिस में कमी आती है. झाओ ने कहा, 'परिणाम के मुताबिक ग्रीन टी में पाया जाने वाला पॉलिफेनॉल्स स्‍पाइनल कॉर्ड की तंत्रिका कोशिकाओं को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस से बचाता है.'


स्‍पाइनल कॉर्ड में चोट दो तरह के होते हैं- प्राथमिक और द्वितीयक. जब चोट यांत्रिक माध्यम से होता है, तो उसे प्राथमिक चोट, जबकि अन्य आंतरिक माध्यमों से होने वाले नुकसान को द्वितीयक की श्रेणी में रखा जाता है. यह अध्ययन पत्रिका 'न्यूरल रिजेनरेशन रिसर्च' में प्रकाशित हुआ है.

एक अनार सौ बीमार नहीं, सौ फायदे कहिए जनाब

अनार में कई स्वास्थ्यवर्धक गुण होते हैं. यह स्वस्थ और खूबसूरत त्वचा के लिए भी काफी फायदेमंद है. वेबसाइट ‘femalefirst.co.uk' के अनुसार, प्राकृतिक एवं आयुर्वेदिक तरीकों से त्वचा की देखभाल करने वाले सौंदर्य प्रसाधनों के ब्रांड अर्बन वेद के ब्रांड प्रबंधक रेन होम्स का कहना है कि अनार में मौजूद एंटीऑक्सिडेंट उम्र बढ़ने के कुप्रभावों से बचाता है.
इसके अलावा भी अनार कई मायनों में फायदेमंद है. अनार में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो बढ़ती उम्र में त्वचा को पोषण देता है, झुर्रियों से बचाता है और सेहत की दृष्टि से भी लाभदायक होता है. अनार का रस त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है. यही नहीं, इसके बीजों को त्वचा की स्क्रबिंग के लिए उपयोग किया जा सकता है.

आम खाने से मोटापा पीड़ितों के ब्लड शुगर का स्तर होगा कम

अब आम आपके स्वास्थ्य का ख्याल रखेगा. मोटापा से पीड़ित लोग अगर रोजाना आम का सेवन करें, तो उनके ब्लड शुगर का स्तर कम हो सकता है. हालिया अध्ययन में यह बात सामने आई है.
अमेरिका के ओकलाहोमा स्टेट यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ ह्यूमन साइंस में पोषण विज्ञान के सहायक प्रोफेसर एड्रालिन लुकास ने कहा, 'निष्कर्ष में यह सामने आया कि मोटापा से पीड़ित लोग लगभग 100 ग्राम आम का रोजाना सेवन करें, तो यह उनके ब्लड शुगर का स्तर कम करने में मदद कर सकता है.' गौरतलब है कि आम में मैग्निफेरिन समेत कई जैव-सक्रिय यौगिक होते हैं, जो एक एंटीऑक्सिडेंट हैं और ब्लड शुगर स्तर को कम करने में सहायक है.

लुकास ने कहा, 'इसके अलावा, आम फाइबर से भरपूर होता है, जो ब्लड में शुगर के अवशोषण को कम करता है.'

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