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Sunday, May 3, 2015

भारत ने आईआरएनएसएस-1डी का किया सफलतापूर्वक प्रक्षेपण

भारत ने शनिवार को यहां से पीएसएलवी..सी27 के जरिये आईआरएनएसएस..1डी को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर दिया, जिसके बाद देश स्वयं की नेवीगेशनल प्रणाली शुरू करने को तैयार है।


59.5 घंटे की उल्टी गिनती के समापन पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के विश्वसनीय प्रक्षेपण यान पीएसएलवी.सी27 का यहां स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से शाम पांच बजकर 19 मिनट पर प्रक्षेपण हुआ। पीएसएलवी.सी27 ने प्रक्षेपण के 21 मिनट बाद उपग्रह को उसकी कक्षा में छोड़ दिया।

इसरो के अध्यक्ष ए एस किरण कुमार ने कहा कि मिशन सफल रहा और उपग्रह को सही कक्षा में स्थापित कर दिया गया है। इसरो के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभालने के बाद कुमार की यह पहली परियोजना थी।

कुमार ने कहा, ‘मैं पीएसएलवी के 28वें सफल मिशन के लिए इसरो की पूरी टीम को बधाई देता हूं जिसने आईआरएनएसएस..1डी को उसकी कक्षा में स्थापित किया जो कि नेवीगेशनल उपग्रह समूह का चौथा उपग्रह है।’

कुमार ने कहा कि पीएसएलवी ने यह दिखा दिया है कि पूर्व के उस प्रक्षेपण कार्यक्रम में बाधा आने के बावजूद उसने विकास की पराकाष्ठा प्राप्त कर ली है जिसे उसकी एक उप प्रणाली में समस्या आने के बाद नौ मार्च से आगे खिसका दिया गया था। उन्होंने कहा, ‘हमने आज एक सफल प्रक्षेपण किया।’ इस प्रक्षेपण से देश इंडियन रीजनल नेविगेशनल सैटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) शुरू करने के लिए तैयार हैं क्योंकि भारत ने सात उपग्रहों के समूह में से चार उपग्रहों को उनकी कक्षा में स्थापित कर दिया है।

परियोजना निदेशक पी कुन्हीकृष्णन ने कहा, ‘यह मिशन इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि हम नेविगेशनल प्रक्रिया शुरू करने के लिए कक्षा में चार उपग्रह की न्यूनतम जरूरत को पूरी कर रहे हैं।’ आईआरएनएसएस..1डी नेविगेशनल, ट्रैकिंग और मानचित्रण सेवा मुहैया कराएगा और इसका जीवन 10 वर्षों का होगा। इसरो ने आईआरएनएसएस गठन के लिए सात उपग्रहों के जिस समूह की योजना बनायी है उसमें आईआरएनएसएस..1डी चौथा होगा। एक बार सभी उपग्रह प्रक्षेपित होने के बाद आईआरएनएसएस अमेरिकी जीपीएस नेवीगेशनल प्रणाली के समकक्ष होगा।

चार उपग्रह आईआरएनएसएस का काम शुरू करने के लिए पर्याप्त होंगे, बाकी तीन उपग्रह उसे और सटीक एवं कुशल बनाएंगे। इसरो के एक और सफल प्रक्षेपण और इस वर्ष के उसके पहले मिशन के तहत 44.4 मीटर लंबा चार चरण वाला ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान 1425 किलोग्राम भार लेकर आकाश को चीरता हुआ अंतरिक्ष में रवाना हुआ। यान ने जैसे ही उपग्रह को उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित किया, वैज्ञानिक खुशी से झूम उठे। इस मिशन में पीएसएलवी के एक्सएल संस्करण का इस्तेमाल किया गया जो कि इस रॉकेट का 28वां सफल प्रक्षेपण था।

चंद्रयान.1, जीसैट.12, रिसैट.1, आईआरएनएसएस..1ए, मार्स आर्बिटर अंतरिक्षयान, आईआरएनएसएस.1बी और आईआरएनएसएस..1सी के बाद यह आठवीं बार था जब एक्सएल संस्करण का इस्तेमाल किया गया। आईआरएनएसएस प्रणाली को इस वर्ष तक पूरा करने की योजना बनायी गई है जिस पर कुल 1420 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। यह दक्षिण एशिया पर लक्षित होगा और इसे देश के साथ ही उसकी सीमा से 1500 किलोमीटर तक के उपयोगकर्ताओं को सटीक स्थिति की सूचना मुहैया कराने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके जरिये स्थलीय और समुद्री नेविगेशन, आपदा प्रबंधन, वाहन ट्रैकिंग और बेड़ा प्रबंधन, पर्वतारोहियों और यात्रियों के लिए दिशासूचक सहायता तथा गोताखोरों के लिए दृश्य एवं आवाज नेविगेशन सुविधा मुहैया करायी जाएगी।

आईआरएनएसएस श्रृंखला के पहले तीन उपग्रहों का प्रक्षेपण क्रमश: एक जुलाई 2013, पिछले वर्ष चार अप्रैल और 16 अक्तूबर को किया गया था। आईआरएनएसएस प्रणाली दो तरह की सेवाएं मुहैया कराएगा जिसमें एक मानक पोजीशनिंग सेवा जो कि सभी उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध होगी तथा सीमित सेवा जो कूट सेवा होगी एवं केवल अधिकृत उपयोगकर्ताओं को ही मुहैया होगी।

किरण कुमार ने इसके साथ ही गांधी शांति पुरस्कार प्राप्त करने के लिए इसरो की पूरी टीम को बधाई दी।

उन्होंने कहा, ‘इसरो दशकों से जो काम कर रहा है, यह उसका वास्तव में बड़ा सम्मान है..मैं पूरे देश, सरकार, प्रधानमंत्री और कैबिनेट के सभी सदस्यों को इसरो में विश्वास जताने तथा समाज की भलाई के लिए उसके योगदान को सम्मानित करने के लिए धन्यवाद देता हू।’

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